German अभिनेता, लेखक और निर्देशक Pascal Breuer कई सालों से शाहरुख खान के लिए German भाषा में dubbing कर रहे हैं. पेश है उनके साथ बसेरा का एक छोटा सा हस्ताक्षर.
बसेरा: आप TV, फिल्म और रंग-मंच कलाकार हैं, dubbing का ख्याल आपको कैसे आया?
Pascal Breuer: dubbing तो मैं बचपन से ही कर रहा हूं. अभिनय प्रशिक्षण के दौरान dubbing से मेरे जेब-खर्च का प्रबन्ध होता था. अब तो मैं dubbing लेखक भी हूं और German भाषा में वार्ता-पुस्तकें लिखता हूं, और साथ फिल्म निर्देशन भी करता हूं. इन सब से मुझे बहुत मज़ा आता है. किसी को अपनी आवाज़ उधार दे कर उस के चरित्र को नया रूप देना असीम आनन्द देता है.
बसेरा: आज-कल रंग-मंच का हाल कैसा है? क्या आज TV, सिनेमा के दौर में भी लोग रंग-मंच को पसन्द करते हैं?
Pascal Breuer: मानव जाति के उदय से ही विश्व की सारी सांस्कृतियों में रंग-मंच कलात्मक अभिव्यक्ति का सब से महत्वपूर्ण ज़रिया रहा है. और मेरा मानना है कि सदा ऐसा रहेगा. शाहरुख भी रंग-मंच पृष्ठ-भूमि से हैं और भारतीय फिल्मों का उदय भी रंग-मंच से हुआ है. रंग-मंच सभी प्रकार के अभिनय प्रतिनिधित्व की बुनियाद है. मैं खुद रंग-मंच पर बहुत काम करता हूं, अधिकतर हास्य अभिनय. और सौभाग्य से hall अधिकतर पूरी तरह भरा होता है.
बसेरा: आपका भारतीय फिल्मों से सम्पर्क कैसे हुआ?
Pascal Breuer: कुछ वर्ष पहले TV channel RTL2 ने नियमित तौर पर Bollywood फिल्में दिखानी आरम्भ की थीं. उस समय शाहरुख की German आवाज़ के लिए काफ़ी बड़ी casting चल रही थी. मैं भी वहां आमन्त्रित था. पर मुझे ये देख कर बड़ी हैरानी हुई कि वहां बोलने के लिए संवाद कम थे और शाहरुख के बोलने और हकलाने के विशिष्ट ढंग पर अधिक बल दिया जा रहा था. उस समय मुझे नहीं पता था कि ये छोटी छोटी बातें शाहरुख के चरित्र को कितना परिभाषित करती हैं.
बसेरा: क्या आपको हिन्दी आती है? भाषा के ज्ञान के बिना आप भावनाओं को कैसे व्यक्त करते हैं?
Pascal Breuer: नहीं, मुझे हिन्दी नहीं आती. पर कुछ फिल्मों मे मुझे कुछ हिन्दी वाक्य बोलने पड़े. तब मेरे साथ हमेशा एक हिन्दी कोच होता था. ज़ाहिर है कि हम अनुवादित और सम्पादित संवाद-पुस्तिकाओं के साथ ही studio में काम करते हैं. भावनाएं चरित्र और कहानी से आती हैं. भावनाएं पूरे विश्व में एक सी हैं और शब्दों में बसती हैं. आखिर मैं अभिनेता किस लिए हूं?
बसेरा: क्या आप केवल शाहरुख के लिए dubbing करते हैं?
Pascal Breuer: नहीं, मैं बहुत विभिन्न प्रकार की फिल्मों में काम करता हूं. मेरे website www.pascalbreuer.de में आप मेरे काम की झलकियां पाएंगे. लेकिन शाहरुख से मुझे सब से अधिक मज़ा आता है. 28 फिल्मों में उसे आवाज़ देने के बाद तो मुझे वह गहरा दोस्त लगने लगा है.
बसेरा: शाहरुख के बोलने के अन्दाज़ के बारे में आपका क्या ख्याल है?
Pascal Breuer: जैसा मैंने पहले कहा, उस का अलग अन्दाज़ है जो उस को अलग करता है.
बसेरा: शाहरुख की कौन सी फिल्म आपको सब से अच्छी लगी?
Pascal Breuer: यह बड़ा कठिन प्रश्न है, क्योंकि उनकी फिल्में बड़ी अलग अलग प्रकार की हैं. पर यह देख कर अच्छा लगता है कि साल दर साल शाहरुख अपने अभिनय में अधिक सटीक और जटिल होते जा रहे हैं. निस्सन्देह वे एक महान कलाकार हैं. फिर भी मुझे उनकी वह फिल्म सब से अच्छी लगती है जिस पर मैंने अभी काम कर रहा हूं, उनकी अब तक की अन्तिम फिल्म 'बिल्लू बार्बर'. अब तो मैं, मेरी पत्नी और मेरी 6 वर्षीय बेटी Bollywood के बड़े प्रशंसक बन गए हैं. मेरी बेटी ने तो कमरे में शाहरुख के poster तक लगा रखे हैं.
बसेरा: dubbing के दौरान कोई यादगार घटना?
Pascal Breuer: जब जब मुझे हिन्दी बोलनी पड़ती है तो स्थिति हास्यास्पद हो जाती है. हालांकि ऐसा कम ही होता है, पर मेरी हिन्दी तो भारतीयों को किसी African भाषा की तरह लगेगी.
बसेरा: क्या आप शाहरुख को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं? क्या आप उनसे मिले हैं?
Pascal Breuer: हम अभी तक मिल नहीं पाए हैं. पर उन्होंने एक साक्षात्कार के दौरान मुझे कृतज्ञता व्यक्त की थी. मेरे लिए ये बड़ी तारीफ़ थी.